पास

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क्रिया-विशेषन[सम्पादन]

अनुवाद[सम्पादन]

यह भी देखिए[सम्पादन]

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प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पास ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पार्श्व]

१. बगल । ओर । तरफ । उ॰— (क) बेंत पानि रक्षक चहुँ पासा । चले सकल मन परम हुलासा । — तुलसी (शब्द॰) । (ख) अति उतुंग जलनिधि चहुँ पासा । — तुलसी (शब्द॰) ।

२. सामीप्य । निकटता । समीपता । जैसे,— (क) उसके पास में भी तो किसी को रहना चाहिए । (ख) बुरे लोगों का पास ठीक नहीं । (ग) उनेक पास से हट जाओ । यौ॰—पासपडो़स । आसपास ।

३. अधिकार । कब्जा । रक्षा । पल्ला । (केवल 'के', 'में' और 'मे' बिभक्तियों के साथ प्रयुक्त) । जैसे,— (क) जब आदमी के पास में धन नहीं रह जाता तब उसकी कोई नहीं सुनता । (ख) दे दो, तुम्हारे पास का क्या जाता है । (ग) हम क्या अपने पास से रुपया देंगे ।

पास ^२ अव्य॰ ? बगल में । निकट । समीप । नजदीक । दूर नहीं । जैसे,— (क) उसके पास जाकर बैठो । (ख) यहाँ से उसका घर पास ही पड़ता है । यो॰—आसपास= (१) अगल बगल । इधर उधर । समीप । जैसे,— घर के आस पास कोई पेड़ नहीं है । (२) लगभग । करीब । जैसे,— ठीक देना नहीं मालूम, (१०) के आसपास होगा । मुहा॰— (किसी स्त्री के) पास आना या जाना =समागम करना । संयोग करना । पास पास = (१) एक दूसरे के समीप । परस्पर निकट । जैसे,— दोनों पुस्तकें पास पास रखी हैं । (२) लगभग । (किसी के) पास बैठना= (१) बगल में बैठना । निकट बैठना । (२) संगत में रहना । सुहबत में रहना । साथ करना । जैसे, — भले आदमियों के पास बैठने से शिष्टता आदी है । (३) पुहँचना । फल या दशा को प्राप्त होना । जैसे, — अब अपने किए के पास बैठ, रोता क्या है ? पास बैठनेवाला = संगत में रहनेवाला । साथ करनेवाला । मेल जोल रखनेवाला । (२) मुसाहिब । पार्श्ववर्ती । (किसी स्त्री के) पास रहना =समागम करना । संभोग करना । पास फटकना= निकट जाना । जैसे,— तुम उसके पास न फटकने पाओगे (विशेषतः निषेध वाक्यों में) ।

२. अधिकार में । कब्जे में । रक्षा में । पल्ले । जैसे,— तुम्हारे पास कितने रुपए हैं ।

३. निकट जाकर । संबोधन करके । किसी के प्रति । किसी से । उ॰— (क) माँगत हैं प्रभु पास यह बार बार कर जोरी । — सूर (शब्द॰) । (ख) सोई बात भई, बहु बाज्यों नहिं सोच परयो, पूछै प्रभु पास याकी न्यूनता बताइए । — प्रियादास (शब्द॰) ।

पास ^३ संज्ञा पुं॰ [अं॰]

१. कहीं जाने का अधिकारचिह्न या पत्र । वह टिकट या आज्ञापत्र जिसे लेकर कहीं बेरोकटोक जा सेकं गमनाधिकार पत्र । राहदारी का परवाना । जैसे, —(क) उन्हों हिंदुस्तान से बाहर जाने का पास मिल गया । (ख) रेलवे के नौकरों को रेल में आने जाने के लिये पास मिलता है ।

२. किसी राह या स्थान से आगे बढ़ने का संकेत या अवसर ।

पास ^४ वि॰

१. पार किया हुआ । तै किया हुआ । निकट गया हुआ । जैसे,— ट्रेन स्टेशन पास कर गई ।

२. किसी अवस्था, श्रेणी, कक्षा आदि के आगे निकला हुआ । उन्नति क्रम में कोई निर्दिष्ट स्थिति पार किया हुआ । किसी दरजे के आगे गया हुआ । जैसे,— आठवाँ दरजा तुमने कब पास किया ?

३. जाँच या परीक्षा में ठीक उतरा हुआ । उत्तीर्ण । सफलीभूत । इम्तहान में कामयाब । फैल का उलटा । जैसे,— (क) वह इस सान इम्तहान में पास हो गया । (ख) उन्होने सब लड़कों को पास कर दिया । क्रि॰ प्र॰— करना ।—होना ।

४. स्वीकृत । मंजूर । जैसे,— (क) सभा ने प्रस्ताव पास कर दिया । (ख) कलक्टर ने बिल पास कर दीया ।

५. जारी । चलता । प्रचलित ।

पास ^५ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पाश] दे॰ 'पाश' ।

पास ^६ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पाशक] दे॰ 'पासा' ।

पास ^७ संज्ञा पुं॰ [सं॰ प्रास (=बिछाना, डालना)] आँवें के ऊपर उपले जमाने का काम ।

पास ^८ संज्ञा पुं॰ [देश॰] भेड़ों के बाल कतरने की कैंची का दस्ता ।

पास ^९ संज्ञा पुं॰ [फा़॰]

१. एक पहर का समय । पहर ।

२. निरीक्षण । निगरानी । हिफाजत । रक्षा ।

३. लिहाज । शील संकोच [को॰] । यौ॰— पासदार=(१) निरीक्षक । (२) पक्षपाती । तरफदार । पासदारी=(१) निरीक्षण । (२) पक्षपात । तरफदारी ।