पाहुना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पाहुना संज्ञा पुं॰ [सं॰ प्राघुर्ण, प्राघुर्णक, प्राघुणा (=अतिथि);अथवा सं॰ उप॰ प्र + आह्वयनेय, प्राह्वयनेय, पा॰ पाहुणेय्य] [स्त्री॰ पाहुनी]

१. अतिथि । मेहमान । अभ्यागत । संबंधी, इष्ट- मित्र या कोई अपरिचित मनुष्य जो अपने यहाँ आ जाय और जिसका सत्कार उचित हो ।

२. दामाद । जामाता । विशेष—इस शब्द की व्युत्पत्ति यों तो प्राघुण से सुगम जान पड़ती है । पर प्राघुण शब्द से ही बनाया गया है । प्राघुर्ण शब्द का प्रयोग भी प्राचीन नहीं है । कथा सरित्- सागर में प्राधुण और पंचतंत्र में प्राघुर्ण शब्द आया हैं । नैषध में भी प्राघुणिक मिलता है । कोशों में तो 'प्राहुण' तक संस्कृत शब्दवत् आया है । पृथ्वीराज रासो (६६ ।३६०) में 'प्राहुन्ना' शब्द का प्रयोग मिलता है—'चित्रंग राय रावर चवै प्राहुन्ना बग्गा फिरै' । पाली का 'पाहुणेय' शब्द इ न सबसे पुराना प्रतीत होता है और उसकी व्युत्पत्ति वही है जो ऊपर दी गई है ।