पीढ़ी

विक्षनरी से
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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पीढ़ी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ पीठिका]

१. किसी विशेष कुल की परंपरा में किसी विशेष व्यक्ति की संतति का क्रमागत स्थान । किसी कुल या वंश में किसी विशेष व्यक्ति से आरंभ करके उससे ऊपर या नीचे के पुरुषों का गणनाक्रम से निश्चित स्थान । किसी व्यक्ति से या उसकी कुलपरंपरा में किसी विशेष व्यक्ति से आरंभ करके बाप, दादा, परदादे आदि अथवा बेटे, पोते, परपोते आदि के क्रम से पहला, दूसरा, चौथा आदि कोई स्थान । पुश्त । जैसे,—(क) ये राजा कृष्णसिंह की चौथी पीढ़ी में हैं । (ख) यदि वंशोन्नति संबंधी नियमों का भली भाँति पालन किया जाय तो हमारी तीसरी पीढ़ी की संतान अवश्य यथेष्ट बलवान् और दीर्घजीवी होगी । विशेष—पीढ़ी का हिसाब ऊपर और नीचे दोनों ओर चलता है । किसी व्यक्ति के पिता और पितामह जिस प्रकार क्रम से उसकी पहली और दूसरी पीढ़ी में हैं उसी प्रकार उसके पुत्र और पौत्र भी । परंतु अधिकतर स्थलों में अकेला पीढ़ी शब्द नीचे के क्रम का ही बोधक होता है; ऊपर के क्रम का सूचक बनाने के लिये प्रायः उसके आगे 'ऊपर की' विशेषण लगा देते हैं । यह शब्द मनुष्यों ही के लिये नहीं अन्य सब पिंडज और अंडज प्राणियों के लिये भी प्रयुक्त हो सकता है ।

२. उपर्युक्त किसी विशेष स्थान अथवा पीढ़ी के समस्त व्यक्ति या प्राणी । किसी विशेष व्यक्ति अथवा प्राणी का संतति समुदाय । जैसे,—(क) हमारे पूर्वजों ने कदापि न सोचा होगा कि हमारी कोई पीढ़ी ऐसे कर्म करने पर भी उतारू हो जाएगी । (ख) यह संपत्ति हमारे पास तीन पीढ़ियों से चली आ रही है ।

३. किसी जाति, दश अथवा लोकमंडल मात्र के बीच किसी कालविशेष में होनेवाला समस्त जनसमुदाय । कालविशेष में किसी विशेष जाति, देश अथवा समस्त संसार में वर्तमान व्यक्तियो अथवा जीवों आदि का समुदाय । किसी विशेष समय में वर्गविशेष के व्यक्तियों की समष्टि । संतति । संतान । नस्ल । जैसे,—(क) भारतवासियों की अगली पीढ़ी के कर्तव्य बहुत ही गुरुतर होंगे । (ख) उपाय करने से गोवंश की दूसरी पीढ़ी अधिक दुधारी और हृष्टपृष्ट बनाई जा सकती है ।

पीढ़ी ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ पीढ़ा] छोटा पीढ़ा । उ॰—चंदन पीढ़ी बैठक सुरति रस बिंजन ।—धरम॰ श॰, पृ॰ ६६ ।