पीतल

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पीतल संज्ञा पुं॰ [सं॰ पित्तल, पीतल]

१. एक प्रसिद्ध उपधातु ज ो ताँबे और जस्ते के संयोग से बनती हैं । कभी कभी इसमें राँगे या सीसे का कुछ अंश मिलाया जाता है । विशेष—यह ताँबे की अपेक्षा कुछ अधिक दृढ़ होती है । इसका व्यवहार बहुधा थाली, कटोरे, गिलास, गगरे, हंडे आदि बरतन बनाने में होता है । देवताओं की मूर्तियाँ, उनके सिंहासन, घंटे अनेक प्रकार के वाद्य, यंत्र, ताले, कलों के कुछ पुरजे और गरीबों के लिये गहने भी पीतल से बनाए जाते हैं । पीतल की चीजें लोहे की चीजों से कुछ अधिक टिकाऊ होती हैं, क्योंकि उनमें मोरचा नहीं लगता । यह पीतल दो प्रकार का होता है—एक कुछ सफेदी लिए पीले रंग का और दूसरा कुछ लाली लिए पीले रंग का । राँगे का भाग अधिक होने से इसमें कुछ सफेदी और सीसे का भाग अधिक होने से लाली आ जाती है । यदि इसमें निकल का मेल दिया जाय तो इसका रंग जर्मन सिलवर के समान हो जाता है । इसपर कलई बहुत अच्छी होती है ।

२. पीला रंग । पीत वर्ण (को॰) ।

पीतल ^२ वि॰ पीत वर्ण का । पीला [को॰] ।