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पीप

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पीप ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ पूय] फूटे फोड़े या घाव के भीतर से निकलनेवाला सफेद लसदार पदार्थ जो दूषित रक्ते का रूपां- तर होता है । विशेष—इसमें रक्त के श्वेत कण ही अधिकता से होते हैं । उनके अतिरिक्त इसमें शरीर के सड़े हुए और नष्ट घटकों और तंतुओं का भी कुछ लाल अंश होता है । शरीर के किसी भाग में इस पदार्थ के एकत्र हो जाने से ही व्रण या फोड़ा होता है और जब तक यह निकल नहीं जाता तब तक बहुत कष्ट होता है ।

पीप पु ^२ संज्ञा पुं॰ [प्रा॰ पिप्पल, हिं॰ पीपल] दे॰ 'पीपल' । उ॰— सुहल्या जनु पोंनय पीप पतं ।—पृ॰ रा॰, १ । ११४ ।