पुराना

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हिन्दी[सम्पादन]

विशेषण[सम्पादन]

अनुवाद[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पुराना ^१ वि॰ [सं॰ पुण्ण] [वि॰ स्त्री॰ पुरानी]

१. जो किसी समय के बहुत पहले से रहा हो । जो किसी विशेष समय में भी हो और उसके बहुत पूर्व तक लगातार रहा हो । जिसे उत्पन्न हुए, बने या अस्तित्व में आए बहुत काल हो गया हो । जो बहुत दिनों से चला आता हो । बहुत दिनों का । जो नया न हो । प्राचीन । पुरातन । बहुपूर्वकालव्यापी । जैसे, पुराना पेड़, पुराना घर, पुराना जूता, पुराना चावल, पुराना ज्वर, पुराना बैर, पुरानी रीति ।

२. जो बहुत दिनों का होने के कारण अच्छी दशा में न हो । जीर्ण । जैसे,— तुम्हारी टोपी अब बहुत पुरानी हो गई बदल दो । उ॰— छुवतहि टूट पिनाक पुराना ।— तुलसी (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰—पड़ना ।—होना । यौ॰—फटा पुराना । पुराना धुराना ।

३. जिसने बहुत जमाना देखा हो । जिसका अनुभव बहुत दिनों का हो । परिपक्व । जिसका अनुभव पक्का हो गया हो । जिसमें कचाई न हो । जैसे,— (क) रहते रहते जब पुराने हो जाओगे तब सब काम सहज हो जायगा । (ख) पुराना काइयाँ, पुराना चोर । मुहा॰— पुराना खुर्राट = (१) बूढ़ा । (२) बहुत दिनों कर अनुभवी । किसी बात में पक्का । पुरानी खोपड़ी = दे॰ 'पुराना खुर्राट' । पुराना घाघ = किसी बात में पक्का । बहुत दिनों तक अनुभव करते करते जो गहरा चालाक हो गया हो । गहरा काइयाँ । पुरानी लीक पीटना = पुराना बुनना । नई सभ्यता, नए संस्कार, विचार आदि का विरेधी होना । पुरानपंथी बनना । उ॰— कोई पुरानी लीक पीटै है कोई कहता है नया ।— भारतेंदु ग्रं॰, भा॰ २, पृ॰ ५७१ । पुराने मुर्दे उखेड़ना = भूली बिसरी बात की याद दिलाना । गई बीती बात की चर्चा छेड़ना । अतीत की अप्रिय बातों की सुधि दिलाना । उ॰— अः तुम तो पुराने मुर्दे उखेड़ती हो ! बेकार ।—सैर कु॰, पृ॰ २६ ।

४. जो बहुत पहले रहा हो, पर अब न हो । बहुत पहले का । अगले समय का । प्राचीन । अतीत । जैसे, (क) पुराना समय, पुराना जमाना । (ख) पुराने राजाओं की बात ही और थी । (ग) पुराने लोग जो कह गए हैं ठीक कह गए हैं । (घ) पुरानी बात उठाने से अब क्या लाभ ?

५. काल का । समय का । जैसे यह चावल कितना पुराना है ?

६. जिसका चलन अब न हो । जैसे, पुराना पहनावा ।

पुराना ^२ क्रि॰ स॰ [हिं॰ पूरना का प्रे॰ रूप]

१. पूरा करना । पुजवाना । भराना ।

२. पालन करना । अनुकूल बात कराना । जैसे, शर्त पुराना । उ॰— मारि मारि सब शत्रु तुर्त निज सर्त पुरावत ।—गोपाल (शब्द॰) ।

३. पूरा करना । भरना । पुजाना । किसी धाव, गड्ढे या खाली जगह को किसी वस्तु से छेक देना । जैसे, धाव पुराना ।

४. पूरा करना । पाल न करना । अनुकूल बात करना । अनुसरण करना । उ॰— सूरदास प्रभु ब्रज गोपिन के मन अभिलाख पुराए ।—सूर (शब्द॰) ।

५. इस प्रकार बाँटना कि सबको मिल जाय । अँटाना । पूरा डालना । †

६. आटे आदि से चौक बनवाना । जैसे, चौक पुराना । उ॰— गजमुकुता हीरामनि चौक पुराइय हो ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ ३ । संयो॰ क्रि॰—देना ।—लेना ।