पोच

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

पोच ^१ वि॰ [फा़॰ पूच]

१. तुच्छ । क्षुद्र । बुरा । निष्कृष्ट । नीच । उ॰—(क) मिट्यौ महा मोह जी को छूट्यो पोच सोच सी को जान्यो अवतार भयो पुरुष पुरान को ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) भलो पोच कह राम को मोको नरनारी । बिगरे सेवक स्वान सो साहेब सिर गारी ।—तुलसी (शब्द॰) । (ग) भलेउ पोच सब बिधि उपजाए । गनि गुन दोष बेद बिलगाए ।—तुलसी (शब्द॰) । (ध) कहिहै जग पोच न सोच कछू फल लोचन आपनो तो लहिहै ।—तुलसी (शब्द॰) । (च) कौन सुनै काके श्रवण काकी सुरति संकोच । कौन निडर कर आपको को उत्तम को पोच ।—सूर (शब्द॰) । (छ) प्रीति भार लै हिए न सोचू । वही पंथ भल होय कि पोचू ।—जायसी (शब्द॰) ।

२. अशक्त । क्षीण । हीन ।

पोच ^२ संज्ञा स्त्री॰ दे॰ 'पोची' ।