प्रति

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हिन्दी[सम्पादन]

विश्लेषण[सम्पादन]

किसी वस्तु का नकल अथवा किसी के लिए आदर व्यक्त करना।

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

प्रति ^१ अव्य॰ [सं॰] एक उपसर्ग जो शब्दों के आरंभ में लगाया जाता है और निम्नांकित अर्थ देता है-

१. विरुद्ध । विपरीत । जैसे, प्रतिकूल, प्रतिकार ।

२. सामने । जैसे, प्रत्यक्ष ।

३. बदले में । जैसे, प्रत्युपकार, प्रतिहिंसा, प्रति- ध्वनि ।

४. हर एक । एक एक । जैसे, प्रत्येक प्रतिदिन, प्रतिक्षण । उ॰—कलप कलप प्रति प्रभु अवतरहीं । चारु चरित नाना विधि करहीं ।—मानस १ । १४० ।

५. समान । सदृश । जैसे प्रतिनिधि, प्रतिकृति । प्रतिलिपि ।

६. मुका- बले का । जोड़ का । जैसे, प्रतिभट, प्रतिवादी, प्रत्युत्तर । इसके अतिरिक्त कहीं कहीं यह उपसर्ग 'ऊपर', 'अंश', 'अग्रभाग' आदि का भी अर्थ देता हैं ।

प्रति ^२ अव्य॰

१. सामने । मुकाबिले में ।

२. ओर । तरफ । लक्ष्य किए हुए । जैसे, किसी के प्रति श्रद्धा रखना ।

प्रति ^३ संज्ञा स्त्री॰

१. नकल ।

२. एक ही प्रकार की कई वस्तुओं में अगल अगल एक एक वस्तु । अदद । जैसे,— इस पुस्तक की दस प्रतियाँ ले लो ।