प्रतिनिधि

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

प्रतिनिधि संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. प्रतिमा । प्रतिमूर्ति ।

२. वह व्यक्ति जो किसा दूसरे की ओर से कोई काम करने के लिये नियुक्त हो । दूसरों का स्थानापन्न होकर काम करनेवाला । विशेष— (क) हमारे यहाँ प्राचीन काल से धार्मिक कृत्यों आदि के लिये प्रतिनिधि नियुक्त करने की प्रथा है । यदि कोई मनुष्य नित्य या नैमित्तिक आदि कर्म आरंभ करने के उपरांत बीच में ही असमर्थ हो जाय तो वह उसकी पूर्ति के लिये किसी दूसरे व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि स्वरूप नियुक्त कर सकता है । (ख) आजकल साधारणतः सर्व- साधारण की ओर से सभाओं आदि में, विचार प्रकट करने और मत देने के लिये, अथवा किसी राज्य या बड़े आदमी की ओर से किसी बात का निर्णय करने के लिये लोग प्रतिनिधि बनाकर भेजे जाते हैं ।

३. जमानतदार । प्रतिभू । जामिन (को॰) ।

४. प्रतिबिंब (डिं॰) ।

५. वह वस्तु या द्रव्य जो किसी वस्तु के अभाव में प्रयुक्त हो (को॰) ।