प्रतिभा

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

प्रतिभा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. बुदि्ध । समझ ।

२. वह असाधारण मानसिक शक्ति जिसकी सहायता से मनुष्य आपसे आप, विशेष प्रयत्न किए बिना ही, किसी काम में बहुत अधिक योग्यता प्राप्त कर लेता और दूसरों से आगे बढ़ जाता है । असाधारण बुदि्धबल या योग्यता जिसकी अभिव्यक्ति बहुधा साहित्य, कला या विज्ञान आदि में होती है । यौ॰—प्रतिभाशाली । प्रतिभावान् ।

३. दीप्ति । चमक । (क्व॰) ।

४. उपयुक्तता । औचित्य (को॰) ।