फटकना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

फटकना ^१ क्रि॰ स॰ [अनु॰ फट, फटक]

१. हिलाकर फट फट शब्द करना । फटफटाना । उ॰—देखे नंद चले घर आवत । ...फटकत स्रवन स्वानि द्वारे पर गगरी करति लराई । माथे पर ह्वै काग उड़ान्यो कुसगुन बहुतक पाई ।—सूर॰, १० । ५४१ ।

२. पटकना । झटकना । फेंकना । उ॰—पान लै चल्यो नृप आ कीन्हों ।...नैकु फटक्यौ लात सबद भयो आघात, गिरयो भहरात सकटा सँहारयो । सूर प्रभु नंदलाल मारयो दनुज ख्याल, मेटि जंजाल ब्रज जन उबारयौ ।—सूर॰, १० । ६२ ।

३. फेंकना । चलाना । मारना । उ॰—(क) असुर गजरूढ़ ह्वै गदा मारै फटकि श्याम अंग लागि सो गिरे ऐसे । बाल के हाथ ते कमल अमल नालयुत लागि गजराज तन गिरत जैसे ।—सूर (शब्द॰) । (ख) राम हल मारि सो वृक्ष चुरकुट कियो द्विविद शिर फटि गयो लगत ताके । बहुरि तरु तोरि पाषण फटकन लग्यो हल मुसल करन परहार बाँके ।—सूर (शब्द॰) ।

४. सूप पर अन्न आदि को हिलाकर साफ करना । अन्न आदि का कूड़ा कर्कट निकालना । उ॰—(क) सत संगति है सूप ज्यों त्यागै फटकि असार । कहै कबीर हरि नाम लै परसै नाहिं बिकार ।—कबीर (शब्द॰) । (ख) पहले फटकै छाज कै थोंथा सब उड़ि जाय । उत्तम भाँड़े पाइयै फटकंता ठहराय ।—कबीर (शब्द॰) । (ग) थोथी कथनी काम न आवै । थोथा फटकै उड़ि उड़ि जावै ।—चरण॰ बानी, पृ॰ २१५ । मुहा॰—फटकना पछारना = दे॰ 'फटकना पछोरना' । उ॰—मूँग मसूर उरद चनदारी । कनक फटक धरि फटकि पछारी ।— सूर, १० । ३६९ । फटकना पछोरना = (१) सूप या छाज पर हिलाकर साफ करना । उ॰—कम थोरे काँकर घने देखा फटक पछोर ।—मलूक॰ बानी, पृ॰ ४० । (२) अच्छई तरह जाँच पड़ताल करना । ठोंकना बजाना । जाँचना । परखना । उ॰—(क) देश देश हम बागिया ग्राम ग्राम की खोरि । ऐसा जियरा ना मिला जो लेइ फटकि पछोरि ।—कबीर (शब्द॰) । तुम मधुकर निर्गुन निजु नीके, देखे फटकि पछोरे । सूरदास कारेन की संगति को जावै अब गोरे ।—सूर॰, १० । ४३८१ ।

५. रूई आदि को फटके से धुनना

फटकना ^२ क्रि॰ अ॰ [अनु॰]

१. जाना । पहुँचना । उ॰—कृष्ण हैं, उद्धव हैं, पर ब्रजवासी उनके निकट फटकने नहीं पाते ।— प्रेमसागर (शब्द॰) ।

२. दूर होना । अलग होना । उ॰— (क) एकहि परनि परे खग ज्यौं हरि रूप माँझ लटके । मिले जाइ हरदी चूना ज्यौं फिर न सूर फटके ।—सूर॰ १० २३८९ । (ख) ललित त्रिभंगी छबि पर अँटके फटके मो सौं तोरि । सूर दसा यह मेरी कीन्हीं आफुनि हरि सौं जोरि ।—सूर॰, १० । २२४७ ।

३. तड़फड़ाना । हाथ पैर पटकना ।

४. श्रम करना । हाथ पैर हिलाना ।

फटकना ^३ संज्ञा पुं॰ गुलेल का फीता जिसमें गुलता रखकर फेंकते हैं ।