फेन

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

फेन संज्ञा पुं॰ [सं॰] [वि॰ फेनिल]

१. महीन महीन बुलबुलों का वह गठा हुआ समूह जो पानी या और किसी द्रव पदार्थ के खूब हिलने, सडने या खौलने से ऊपर दिखाई पड़ता है । झाग । बुदबुदसंघात । यौ॰—फेनदुग्धा ।फेनधर्मा = क्षणभंगुर । फेनपिंड =(१) बुल- बुला । बुदबुद । (२) निरर्थक विचार । सारहीन बात । फेनवाही =(१) फेन की तरह शुभ्र वस्त्र । (२) छनना । छानने का कपड़ा । क्रि॰ प्र॰—उठना ।—निकलना ।

२. मुख से निकला हुआ झाग या फेन (को॰) ।

३. लार । लाला (को॰) ।

४. रेंट । नाक का मल ।