बंचनता

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

बंचनता संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ वञ्चनता] ठगी । छल । उ॰—दम दान दया नहिं जानपनी । जड़ता पर बंचनताति घनी ।—तुलसी (शब्द॰) ।