बंस

विक्षनरी से
Jump to navigation Jump to search


हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

बंस संज्ञा पुं॰ [सं॰ वंश]

१. कुल । खानदान । उ॰—(क) सोइ सुनो स्रवण तिहिं बंस जाँम ।—ह॰ रासो, पृ॰ ६६ । (ख) मालूम होता है, छत्तरी बंस है ।—मान॰, भा॰ ५, पृ॰ ६ । मुहा॰—बंस के बजाना = वंश या कुल, खानदान की मर्यादा का निर्वाह करना । उ॰—दारुन तेज दिलीस के बीरनि काहू न वंस के बाने बजाए । छोड़ि हथ्यारनि हाथनि जोरि तहाँ सब ही मिलि मूँड़ मुड़ाए ।—मति॰ ग्रं॰, पृ॰ ४०५ ।

२. बाँस । उ॰—मिश्री माँहैं मेल करि मोल बिकाना बंस । यौं दादू महिंगा भया पारब्रह्म मिलि हंस ।—दादू॰, पृ॰ ११९ । दे॰ 'वंश' ।