बकवाद

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

बकवाद संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰बक + वाद] व्यर्थ की बात । बकबक । सारहीन वार्ता । उ॰— (क) खलक मिला खाली रह ा किया बकवाद । बाँझ झुलावे पालना तामे कौन सवाद ।— कबीर (शब्द॰) । (ख) कहि कहि कपट सँदेसन मधुकर कत बकवाद बढ़ावत । कारो कुटिल निठुर चित अतर सूरदास कवि गावत ।—सूर (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰—करना ।—मचाना ।—होना ।