बकोट

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

बकोट ^१ सज्ञा पुं॰ [सं॰] एक नाम का पक्षी । बगुला उ॰— लाजालू गुल चिमन मै, खगकुल माँह बकोट । मावांडिया मिनखाँ महीं याँ तीनों में खोट ।—बाँकी॰, ग्रं॰ भा॰ २, पृ॰ १७ ।

बकोट ^२ सज्ञा स्त्री॰ [सं॰ प्रकोष्ठ, पा॰ पक्कोठ्ट या सं॰ अभीकोष्ठ]

१. पजे की वह स्थिति जो किसी वस्तु को ग्रहण करने या नोचने आदि के समय होती है । हाथ की अंगुलियों की संपुटाकार मुद्रा । किसी पदार्थ की उतनी मात्रा जो एक बार चँगुल में पकड़ी जा सके । जैसे, एक बकोट आँटा ।

३. बकोटने या नोचने की क्रिया या भाव ।