बढ़ना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

बढ़ना क्रि॰ अ॰ [सं॰ वर्द्धन, प्रा॰ बड्ढन]

१. विस्तार या परिमाण में अधिक होना । डील डौल या लंबाई चौड़ाई आदि में ज्यादा होना । वर्धित होना । वृद्धि को प्राप्त होना । जैसे, पौधे का बढ़ना, बच्चे का बढ़ना, दीवार का बढ़ना खेत का बढ़ना, नदी बढ़ना । संयो॰ क्रि॰—जाना । मुहा॰—बात बढ़ना = (१) विवाद होना । झगड़ा होना । (२) मामला टेढ़ा होना ।

२. परिमाण या संख्या में अधिक होना । गिनती या नाप तौल में ज्यादा होना । जैसे, धन धान्य का बढ़ना, रुपए पैसे का बढ़ना, आमदनी बढ़ना, खर्च बढ़ना । संयो॰ क्रि॰—जाना ।

३. अधिक व्यापक, प्रबल या तीव्र होना । बल, प्रभाव, गुण आदि में अधिक होना । असर या खासियत वगैरह में ज्यादा होना । जैसे, रोग बढ़ना, पीड़ा बढ़ना । प्रताप बढ़ना, यश बढ़ना, किर्ति बढ़ना, लालच बढ़ना ।

४. पद, मर्यादा, अधिकार विद्या बुद्धि, सुख संपत्ति आदि में अधिक होना । दौलत रुतवे या इख्तियार में ज्यादा होना । उन्नति करना । तरक्की करना । जैसे—(क) पहले उन्होंने बीस रुपए की नौकरी की थी, धीरे धीरे इतने बढ़ गए । (ख) आजकल सब देश भारतवर्ष से बढ़े हुए हैं ।