बरतना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

बरतना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ वर्तन] किसी के साथ किसी प्रकार का व्यवहार करना । बरताव करना । जैसे,—जो हमारे साथ बरतेगा उसके साथ हम भी बरतेंगे ।

बरतना ^२ क्रि॰ स॰ काम में लाना । व्यवहार में लाना । इस्तेमाल करना । जैसे, —यह कटोरा हम बरसों से बरत रहे हैं, पर अभी तक ज्यों का त्यों बना है ।

बरतना ^३ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ वर्तनी] एक प्रकार की कलम । बरतनी । उ॰—राजपूताना में अब भी लकड़ी की गोल तीखे मुँह की कलम को जिससे बच्चे पट्टे, पर सूरखी बिछाकर अक्षर बनाना सीखते हैं थरथा या बरतना कहते हैं ।—भा॰ प्रा॰ लि॰, पृ॰ ६ ।