बर्फ

विक्षनरी से
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हिन्दी

संज्ञा

  1. हिम

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

बर्फ संज्ञा स्त्री॰ [फा॰ बर्फ]

१. हवा में मिली हुई भाप के अत्यंत सूक्ष्म अणुओं की तह जो वातावरण की ठंढक के कारण आकाश में बनती और भारी होने के कारण जमीन पर गिरती है । पाला । हिम । तुषार । विशेष—गिरते समय यह प्रायः रुई की तरह मुलायम होती है और जमीन पर गिरकर अधिक ठंढक के कारण जम जाती है । जमने से पहले यदि चाहें तो इसे एकत्र करके ठोस गोले आदि के रूप में भी बना सकते हैं । जमने पर इसका रंग बिलकुल सफेद हो जाता है । ऊँचे पहाड़ों आदि पर प्रायः सरदी के दिनों में यह अघिकता से गिरती है और जमीन पर इसकी छोटी मीटी तहे जम जाती हैं जिन्हें पीछे से फावड़े आदि से खोदकर हटाना पड़ता है । क्रि॰ प्र॰—गलना ।—गिरना ।—पड़ना ।

२. बहुत अधिक ठंढक के कारण जमा हुआ पानी जो ठोस और पारदर्शी होता है और जी आघात पहुँचने पर टुकड़े टुकड़े हो जाता है । विशेष—जिस समय जल में तापमान की ४ अंश की गरमी रह जाती है तब वह जमने लगता है और ज्यों ज्यों जमता जाता है त्यों त्यों फैलकर कुछ अधिक स्थान घेरने लगता है, यहाँ तक कि जब वह बिल्कुल जम जाता है और उसमें तापमान O (शून्य) अंश जाता तब उसके आकार में प्रायः १/११ वे अश की वृदि्ध हो जाती है । जबतक उसका ताप- मान घटकर ४° तक नहीं पहुँच जाता तबतक तो वह सिमटता और नीचे बैठता है पर जब उसका तापमान ४° से भी कम होने लगता है तब वह फैलकर हलका होने लगता है और अंत में आस पास के पानी पर तैरने लगता है । साधारणत; जल में तैरती हुई बफ का ९/१० वाँ भाग पानी के भीतर और १/१० भाग पानी के ऊपर होता है । प्रायः जाड़ी के दिनों में अथवा और किसी प्रकार सरदी बढ़ने के कारण समुद्र आदि का बहुत सा जल प्राकृतिक रूप से जमकर बर्फ बन जाता है । क्रि॰ प्र॰—गलना ।—जमना । मुहा॰—बर्फ होना=बहुत ठंढा होना । जैसे,—मरने से एक घटे पहले उनका सारा शरीर बर्फ हो गया ।

३. मशानों आदि की सहायता अथवा और कृत्रिम उपायों से ठढक पहुँचाकर जमाया हुआ पानी जो साधारणतः बाजारों में बिकता है और जिससे गर्मी के दिनों में पीने के लिये जल आदि ठंढा करते है । क्रि॰ प्र॰—गलना ।—गलाना ।—जमना ।—जमाना ।

५. दे॰ 'ओला' ।

बर्फ ^२ वि॰

१. अत्यत शीतल । बरफ की तरह ठंढा ।

२. बर्फ की तरह श्वेत । एक दम सफेद ।