बाँसुरी

विक्षनरी से
Jump to navigation Jump to search


हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

बाँसुरी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ बाँस + उरी (प्रत्य॰)] बाँस का बना हुआ प्रसिद्ध बाजा जो मुँह से फूँककर बजाया जाता है । मुरली । वंशी । बाँसली । विशेष—यह बाज प्रायः डेढ़ बालिश्त लंबा होता है और इसक ा एक सिरा बाँस की गाँठ के कारण बंद रहता है । बंद सिरे की ओर सात स्वरों के लिये सात छेद होते हैं और दूसरी और वजाने के लिये एक विशेष प्रकार से तैयार किया हुआ छेद होता है । उसी छेदवाले सिरे को मुँह में लेकर फूँकते हैं और स्वरोंवाले छेदों पर उँगालियाँ रखकर उन्हें बंद कर देते हैं । जब जो स्वर निकालना होता है तब उस स्वरवाले छेद पर की उँगली उठा लेते हैं ।