बिकना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

बिकना क्रि॰ अ॰ [सं॰ विक्रयण] किसी पदार्थ का द्रव्य लेकर दिया जाना । मूल्य लेकर दिया जाना । बेचा जाना । बिक्री होना । संयो॰ क्रि॰—जाना । मुहा॰—किसी के हाथ बिकना = किसी का अनुचर, सेवक या दास होना । किसी का गुलाम बनना । जैसे, हम उनके हाथ बिके तो नहीं,जो उनका हुकुम माने । विशेष—कभी कभी इस अर्थ में और विशेषतः मोहित होने क े अर्थ में केवल 'बिकना' शब्द का भी प्रयोग होता है । जैसे,—ठानहैं ऐसी नहीं करिके कर तोष चितै जेहिं कान्ह बिकानु है ।—तोष (शब्द॰) ।