बुत

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

बुत संज्ञा पुं॰ [फा॰, मि॰ सं॰ बुद्ध]

१. मूर्ति । प्रतिमा । पुतला ।

२. वह जिसके साथ प्रेम किया जाय । प्रियतम । उ॰— खुद ब खुद आज जो वो वुत आया, मैं भी दौड़ा खुदा खुदा करके ।—भारतेंदु ग्रं॰, भा॰ २, पृ॰ २२० ।

३. सेसरबुत नाम के खेल में वह दाँव जिसमें खिलाड़ी के हाथ में केवल बसवीरें हों अथवा तीनों ताशों की बुंदियों का जोड़ १०, २० या ३० हो । विशेष दे॰ 'सेसरबुत' । यौ॰—बुतखाना=मंदिर । मूर्तिस्थान । बुततराश=मूर्ति बढ़नेवाला । बुतपरस्त । बुर्तशकन ।

बुत ^२ वि॰ मूर्ति की तरह चुपचाप बैठा रहनेवाला । जो कुछ भी बोलता चालता न हो । जैसे, नशे में बुत हो जाना ।