बेला

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

बेला ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ मल्लिक]

१. चमेली आदि की जाति का छोटा पौधा जिसमें सफेद रंग के सुगधित फूल लगते हैं । विशेष—ये फूल तीन प्रकार की होते हैं—(१) मोतिया,जो मोती के समान गोल होता है, (२) मोगरा जो उससे बड़ा और प्रायः सुपारी के बराबर होता है और (३) मदन- बान, जिसकी कली प्रायः एक इंच तक लंबी होती है ।

२. मल्लिका । त्रिपुरा ।

३. बेले के फूल के आकार का एक प्रकार का गहना ।

बेला ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ वेला]

१. लहर । उ॰—बेला सम बढ़ि सागर रण मैं । लव कह कूल सरिस तेहि क्षण मैं ।—रामाश्व॰ (शब्द॰) ।

२. चमड़े की बनी हुई एक प्रकार की छोटी कुल्हिया जिसमें एक लंबी लकड़ी लगी रहती है और जिसकी सहायता से तेल नापते या दूसरे पात्र में भरते हैं ।

३. कटोरा । उ॰—बेला भरि हलधर को दीन्हों । पीवत पै बल अस्तुति कीन्हों ।—सूर (शब्द॰) ।

४. समुद्र का किनारा । उ॰—बरनि न जाइ कहाँ लौ बरनौ प्रेम जलधि बेला बल बोरे ।—सूर (शब्द॰) ।

५. समय । वक्त ।

६. दे॰ 'बेला' ।

बेला ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰] एक तंत्रवाद्य । दे॰ 'बेहला' । उ॰— हमने डाक बंगाली को देखा के जब वह बेला बजाने लगता आप भी मस्त हो जाता ।—रस क॰ (भू॰), पृ॰ ९ ।