बैठक

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

बैठक संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ बैठना] बैठने का स्थान । उ॰—चरष सरोवर समीप किधों बि/?/ क्वणित कलहसेन की बैठक बनाय की ।—केशव (शब्द) ।

२. वह स्थान जह कोई बैठता हो अथवा जहाँपर दुसरा/?/ आकर उसके साथ बैठा करते हों । चोपाल । अथाइ । उ॰—वह अपनी बैठक न पलंग पर लेटा है, उसकी आँख क/?/ से लगी हैं, भोहे कुछ कुछ ऊपर को खिच गई है ओर वह चुपचाप देवहूति की छबि मन ही मन खींच रहा है ।—अधखिला । (शब्द॰) । यौ॰—बैठकखाना = बैठने का स्थान ।

३. वह पदार्थ जिसपर बैठा जाता है । आसन । /?/ठ । उ॰— (क) अति आदर सो बैठक दोन्हों । मेरे गृह /?/वलि आई अति ही आनँद कीन्हो ।—सूर (शब्द॰) । (क) पिय आवत अँगनैया उठि कै लीन । /?/ चतुर तिरियवा पदक /?/ ।— रहिमन (शब्द॰) ।

४. किसी मूर्ति या खभे आदि के नीचे की चोकी । आधार । पदस्तल ।

५. बैठने का व्यागर । बैठाई ।