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भँगार

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भँगार

  1. पुरानी, टूटी-फूटी, अनुपयोगी वस्तुएँ; कबाड़।
  2. धातु, प्लास्टिक, कागज़ आदि का वह सामान जो बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, किंतु पुनः उपयोग या पुनर्चक्रण में लाया जा सकता है।

(दिल्ली हिंदी) अ॰ध॰व॰/आई॰पी॰ए॰(कुंजी): /bʱəŋ.ɡɑːɾ/, [bʱə̃ŋ.ɡäːɾ]

उदाहरण वाक्य

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  • उसने पुराने अख़बार और भँगार बेच दिए।
  • भँगार से भी उपयोगी चीज़ें बनाई जा सकती हैं।

प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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भँगार ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ भड्न]

१. जमीन में का वह गड्ढा जो बरसात के दिनों मे आपसे आप हो जाता है और जिसमें वर्षा का पानी समाता हें ।

२. वह गड्ढा जो कुआँ बनाते समय खोदा जाता है ।

भँगार ^२ संज्ञा सं॰ [हिं॰ भाँग] घास फूस । कूडा़ करकट । उ॰— (क) माला फेरे कुछ नहीं डारि मुआ गल भार । ऊपर ढेला ही गल भीतर करा भँगार ।—कबीर (शब्द॰) । (ख) वैष्णव भया तो क्या भया माला पहिरी चार । ऊपर कलो लपेट के भीतर भरा भँगार ।—कबीर (शब्द॰) ।