भँडा़ना

विक्षनरी से
Jump to navigation Jump to search


हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

भँडा़ना क्रि॰ स॰ [हिं॰ भाँड़]

१. उछल कूद मचाना । उपद्रव करना ।

२. दौड़ धूप करके वस्तुओं को अस्त व्यस्त करना वा तोड़ना फोड़ना । नष्ट करना । उ॰—नंद घरनि सुत भलो पढा़यो । ब्रज की बीथिन पुरनि धरनि घर बाट घाट सब शोर मचायो । लरिकन मारि भजन काहू के काहू को दधि दूध लुटायो । काहू के घर करत बडा़ई मैं ज्यों त्यों करि पकरन पायो । अब तो इन्हें जकरिं बाँधोंगी इहि सब तुम्हारो गाँव भँडायो सूरश्याम भुज गहि नँदरानी बहुरि कान्ह सपने ढिग आयो ।—सूर (शब्द॰) ।