भँवरी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

भँवरी ^१ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ भँवरा]

१. पानी का चक्कर । भँवर । उ॰—जहँ नदि नीर गँभीर तहाँ भल भँवरी परइ । छिल छिल सलिल न परै परै छबि नहिं करई ।—नद॰ ग्रं॰, पृ॰ १३ ।

२. जंतुओं के शरीर के ऊपर वह स्थान जहाँ के रोएं और बाल एक केंद्र पर घूमे हुए हों । बालों का इस प्रकार का घुमाव स्यानभेद से सुभ अथवा अशुभ लक्षण माना जाता है । उ॰—स्याम उर सुधा दह मानौ ।......उरजु भँवरी भँवर, मीनौ नील मनि की कांति । भृगुचरन हिय चिह्न ये सब जीव जल बहु भाँति ।—सूर॰, १० ।१८३८ ।