भक्तद्वेष

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

भक्तद्वेष संज्ञा पुं॰ [सं॰] मंदाग्नि । भोजन में अरुचि । उ॰— अन्न का स्मरण, श्रवण, दर्शन और वास आदि इनसे जिसको त्रास होय उसको भक्तद्वेष कहते हैं ।—माधव॰, पृ॰ १०२ ।