भक्तिरस
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]भक्तिरस संज्ञा पुं॰ [सं॰] उपास्य के प्रति उत्कृष्ठ अनुराग । रति । विशेष—संस्कृत के परवर्ती विद्वानों ने भक्ति को रस के रूप में मान्यता दी है ।
भक्तिरस संज्ञा पुं॰ [सं॰] उपास्य के प्रति उत्कृष्ठ अनुराग । रति । विशेष—संस्कृत के परवर्ती विद्वानों ने भक्ति को रस के रूप में मान्यता दी है ।