भगर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

भगर पु ^१ संज्ञा पुं॰ [देश॰]

१. छल । फेरब । ढोंग । उ॰—काटे जो कहत सीस, काटत घनेरे घाघ, भगर के खेले महाभठ पद पावहीं ।—केशव (शब्द॰) ।

२. इंद्रजाल । बाजीगरी । भगल । उ॰—हय हिंसहिं गज चिकारि भगर सम दिषि कुलाहल ।—पृ॰ रा॰, ८ ।५४ ।

३. † चूर जो सूखा हो । मोटा चूर । उ॰—नामदेव का स्वामी भानी न्हागरा । राम भाई न परी भगरा ।—दक्खिनी॰, पृ॰ ३६ ।

भगर ^२ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ भगरना] सड़ा हुआ अन्न ।