भाइ

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

भाइ पु † ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ भाव]

१. प्रेम । प्रीति । मुहब्बत । उ॰— आय आगे लेन आप दिए हैं पठाय जन देखी द्वारावती कृष्ण मिले बहु भाइ कै ।— प्रियादास (शब्द॰) ।

२. स्वभाव । भाव । उ॰— भोरे भाई भोरही ह्वाँ खेलन गई ही खेल ही में खुल खेले कछु औरै कढ़ि रहयौ है ।—देव (शब्द॰) ।

३. विचार । उ॰— पिता /?/ पति भूख लै सतायो अति माँगे तिया पास नहीं ।/?/ प्रियादास (शब्द॰) ।

भाइ ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ भाँति]

१. भाँति । प्रकार । तरह । उ॰— (क) तब ब्रह्मा सों कह्यो सिर नाइ । जै ह्वैहै हमरी किहि भाइ ।— सूर (शब्द॰) । (ख) आशु बरषि हियरे हरषि सीतल सुखद सुभाइ । निरखि निरखि पिय मुद्रिकहि बरनति हैं बहु भाई ।— केशव (शब्द॰) ।

२. ढंग । चाल- ढाल । रंग ढंग । उ॰—बहु बिधि देखत पुर के भाइ । राज सभा महँ बैठे जाइ ।— केशव (शब्द॰) ।