भालू

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हिन्दी[सम्पादन]

संज्ञा[सम्पादन]

पु.

अनुवाद[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

भालू संज्ञा पुं॰ [सं॰ भल्लुक] एक प्रसिद्ध स्तनपायी भीषण चौपाया जो प्रायः सारे संसार के बड़े बड़े जंगलों और पहाड़ों में पाया जाता है । रीछ । विशेष— आकार और रंग आदि के विचार से यह कई प्रकार का होता है । यह प्रायः ४ फुट से ७ फुट तक लंबा और २ १/२ फुट से ४ फुट तक ऊँचा होता है । साधारणतः यह काले या भूरे रंग का होता है और इसके शरीर पर बुहत बड़े बड़े बाल होते हैं । उत्तरी ध्रुव के भालू का रंग प्रायः सफेद होता है । यह मांस भी खाता है और फल, मूल आदि भी । यह प्रायः दिन भर माँद में सोया रहता है और रात के समय शिकार की तलाश में बाहर निकलता है । भारत में प्रायः मदारी इसे पकड़कर नाचना और तरह तरह के खेल करना सिखलाते हैं । इसकी मादा प्रायः जाड़े के दिनों में एक साथ दो बच्चे देती है । बहुत ठंढे देशों में यह जाड़े के दिनों में प्रायः भूखा प्यासा और मुरदा सा होकर अपनी माँद में पड़ा रहता है । और वसंत ऋतु आने पर शिकार ढूँढ़ने निकलता है । उस समय यह और भी भीषण हो जाता है । यह शिकार के पीछे अथवा फल आदि खाने के लिये पेड़ों पर भी चढ़ जाता है । जंगल में यह अकेले दुकेले मनुष्यों पर भी आक्रमण करने से नहीं चूकता ।

यह भी देखिए[सम्पादन]