भीतर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

भीतर ^१ क्रि॰ वि॰ [सं॰ अभ्यन्तर देशी भित्तर, भीतर] अदर । में जैसे,—घर के भीतर, महीन भर के भीतर, सौ रुपए के भीतर । उ॰—भरत मुनिहि मन भीतर भाए । सहित समाज राम पह आए ।—तुलसी (शब्द॰) । मुहा॰—भीतर का कूआँ = वह उपयोगी पदार्थ जिससे कोई लाभ न उठा सके । अच्छी, पर किसी के काम न आ सकने योग्य चीज । उ॰—सूरदास प्रभू तुम बिन जोबन घर भीतर को कूप ।—सूर (शब्द॰) । भीतर पैठकर देखना = तत्व जानना । असलियत जाँचना ।

भीतर ^२ संज्ञा पुं॰

१. अंत करण । हृदय । जैसे,—जो बात भीतर से न उठे, वह न करनी चाहिए । मुहा॰—भीतर ही भीतर = मन ही मन । हृदय में ।

२. रनिवास । जनानखाना । उ॰—अवधनाथ चाहत चलन भीतर करहु जनाउ । भए प्रेम बस सचिव सुनि विप्र सभासद राउ ।—तुलसी (शब्द॰) ।