भेड़

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हिन्दी

संज्ञा

स्त्री.

अनुवाद

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हिन्दी

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

भेड़ ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ भेष या भेड] [संज्ञा पुं॰ भेंड़ा]

१. बकरी की जाति का, पर आकार में उससे कुछ छोटा एक प्रसिद्ध चौपाया जो बहुत ही सीधा होता है और किसी को किसी प्रकार का कष्ट नही पहुँचाता । गाडर । विशेष— भेड़ प्रायः सारे संसार में पाई जाती है । यह दूध, ऊन और मांस के लिये पाली जाती है । इसका दूध गौ के दूध की अपेक्षा गाढ़ा होता है और उसमें से मक्खन अधिक निकलता है इसका मांस बकरी के मांस की अपेक्षा कुछ कम स्वादिष्ट होता है; पर पाश्चात्य देशों में अधिकता से खाया जाता है । इसके शरीर पर ऊन बहुत निकलता है और प्रायः उसी के लिये इस देश के गड़ेरिए इसे पालते हैं । कहीं कहीं की भेड़ें आकार में बड़ी भी होती हैं और उनका मांस भी स्वादिष्ट होता है । इसके नर को भेड़ा और बच्चे को मेमना कहते हैं । इसकी एक जाति की दुम बहुत चौड़ी और भारी होती है जिसे दुंबा कहते हैं । दे॰ 'दुंबा' । मुहा॰—भेड़ियाधमान = बिना परिणाम सोचे समझे दूसरों का अनुसरण करना । विशेष— भेड़ों का यह नियम होता है कि यदि एक भेड़ किसी और को चल पडती है, तौ बाकी सब भेड़ें भी चुपचाप उसके पीछे हो लेती हैं । संस्कृत में भेड़ियाधमान को गड्डलिका- प्रवाह कहते हैं ।

२. बहुत सीधा या मूर्ख मनुष्य ।

भेड़ ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ भिड़ाना या भेढ़ना (=थप्पड़ मारना)] चाँटा । थप्पड़ । (बाजारू) ।