भैंस

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

भैंस संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ महिषी, हिं॰ भैसि]

१. गाय की जाति और आकार प्रकार का पर उससे बड़ा चौपाया (मादा) जिसे लोग दूध के लिये पालते है । विशेष—भैस सारे भारत में पाई जाती है और यहीं से विदेश में गई है । इसके शरीर का रग बिलकुल काला होता है और इसके राएँ कुछ बड़े होते हैँ । यह प्राय़ः जल या कीचड़ आदि में रहना बहुत पसंद करती है । इसका दूध गौ के दूध की अपेक्षा अधिक गाढ़ा होता है और उसमें से मक्खन या घो भी अधिक निकलता है । मान में भी य़ह गी से बहुत अधिक दूध देती है । इसके नर की भँसा कहते है । मुहा॰— भैस काटना = गरमी का रोग होना ।उपदेश होना (बाजारु) । भैस के आगे बीन बजाए भैस खड़ी पगुराय = किसी से कोई अर्थयुक्त और काम की बात कही जाय, परंतु जिससे कहीं जाय वह सुने या समझे ही नहीं । उ॰— मैने इसी से मसविदा लिख लिया था कि उन लोगों को सुनाऊँगा । मगर भैस के आगे बीन बजाए भैस खड़ी पगुराय़ ।— फिसाना॰, भा॰

३. पृ॰ ४१९ ।

२. एक प्रकार की मछली । विशेष— यह पंजाव, बंगाल तथा दक्षिणी भारत की नदियों में पाई जाती है । इसकी लंबाई, तीन फुट होती है । इसका मांस खाने में स्वादिष्ट होता है, परतु उसमें हाड़ुयाँ इधिक होती है ।

३. एक प्रकार की घास ।