मकड़ी

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हिन्दी

संज्ञा

मकड़ी स्त्री॰

  1. एक प्रकार का जीव है।

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

मकड़ी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ मर्कटक या मर्कटी]

१. एक प्रकार का प्रसिद्ध कीड़ा जिसकी सैकड़ों हजारों जातियाँ होती हैं और जो प्रायः सारे संसार में पाया जाता है । विशेष—इसका शरीर दो भागों में विभक्त हो सकता है । एक भाग में सिर और छाती तथा दूसरे भाग में पेट होता है । साधारणतः इसके आठ पैर और आठ आँखें होती हैं । पर कुछ मकड़ियों को केवल छह, कुछ को चार और किसी किसी को किवल दो ही आँखों होती हैं । इनकी प्रत्येत टाँग में प्रायः सात जोड़ होते हैं । प्राणिशास्त्र के ज्ञाता इसे कीट वर्ग में नहीं मानते; क्योंकि कीटों को केवल चार पैर और दो पंख होते हैं । कुछ जाति की मकड़ियाँ विषैली होती हैं और यदि उनके शरीर से निकलनेवाला तरल पदार्थ मनुष्य के शरीर से स्पर्श कर जाय, तो उस स्थान पर छोटे छोटे दाने निकल आते हैं जिनमें जलन होती है और जिनमें से पानी निकलता है । कुछ मकड़ियाँ तो इतनी जहरीली होती हैं कि कभी कभी उनके काटने से मनुष्य की मृत्यु तक हो जाती है । मकड़ी प्रायः घरों में रहती है और अपने उदर से एक प्रकार का तरल पदार्थ निकालकर उसके तार से घर के कोनों आदि में जाल बनाती है जिसे जाल या झाला कहते हैं । उसी जाल में यह मक्खियाँ तथा दूसरे छोटे छोटे कीड़े फँसाकर खाती है । दीवारों की संधियों आदि में यह अपने शरीर से निकाले हुए चमकीले पत्तले और पारदर्शीं पदार्थ का घर बनाती है और उसी में असंख्य अंडे देती है । साधारणतः नर से मादा बहुत बड़ी होती है और संभीग के समय मादा कभी कभी नर को खा जाती हा । कु छ मकड़ियाँ इतनी बड़ी होती हैं कि छोटे मोटे पक्षियों तक का शिकार कर लेती हैं । मकड़ीयाँ प्रायः उछलकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाती हैं । इनकी कुछ प्रसिद्ध जातियों के नाम इस प्रकार हैं—जंगली मकड़ी, जल मकड़ी, राज- मकड़ी, कोष्टी मकड़ी, जहरी मकड़ी आदि ।

२. मकड़ी के विष के स्पर्श से शरीर में होनेवाले दाने, जिनमें जलन होती है और जिनमें से पानी निकलता है ।