मछली

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हिन्दी

संज्ञा

स्त्री.

अनुवाद

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

मछली संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ मत्स्य, प्रा॰ मच्छ] सदा जल में रहनेवाला एक प्रसिद्ध जीव । मीन । मत्स्य । उ॰—मछली को तैरना कोई नहीं सिखाता । वैसे ही, चढ़ती उम्र की कामिनी को प्रणय के पैतरे सिखाने नहीं पड़ते ।—वो दुनिया, पृ॰ ५६ । विशेष—इस जीव की छोटी बड़ी असंख्य जातियाँ होती हैं । इसे फेफड़े के स्थान में गलफड़े होते हैं जिनकी सहायता से यह जल में रहकर ही उसके अंदर की हवा खींचकर साँस लेती है; ओर यदि जल से बाहर निकाली जाय, तो तुरं त मर जाती है । पैरों या हाथों के स्थान में इसके दोनों ओर दो पर होते हैं जिनकी सहायता से यह पानी में तैर सकती है । कुछ विशिष्ट मछलियों के शरीर पर एक प्रकार का चिकना चिमड़ा छिलका होता है जो छीलने पर टुकड़े टुकड़े होकर निकलता है और जिससे सजावट के लिये अथवा कुछ उपयोगी सामान बनाए जाते हैं । अधिकांश मछलियों का मांस खाने के काम में आता है । कुछ मछलियों की चर्बी भी उपयोगी होती है । इसकी उत्पत्ति अंड़ों से होती है । यौ॰—मछली का तेल=रोग में उपयोगी मछली का तेल । मछली का दाँत=गैंड़ के आकार के एक पशु का दाँत जो प्रायः हाथीदाँत के समान होता है और इसी नाम से बिकता है । मछली का मोती=एक प्रकार का कल्पित मोती जिसके विषय में लोगों की यह धारणा है कि यह मछली के पेट से निकलता है, गुलाबी रंग और घुँघची के समान होता है और बड़े भाग्य से किसी को मिलता है । मछली की स्याही= एक प्रकार का काला रोगन जो भूमध्यसागर में पाई जानेवाली एक प्रकार की मछली के अंदर से निकलता हैं और जो नक्शे आदि खींचने के काम में आता है ।

२. मछली के आकार का बना हुआ सोने, चाँदी आदि का लटकन जो प्रायः कुछ गहनों में लगाया जाता है ।

३. मछली के आकार का कोई पदार्थ ।

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