मधुमक्खी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

मधुमक्खी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ मधुमक्षिका] एक प्रकार की प्रसिद्ध मक्खी जो फूलों का रस चूसकर शहद एकत्र करती है । मुमाखी । विशेष—दस हजार से पचास हजार तक मधुमक्खियाँ एक साथ एक घर बनाकर रहती है जिसे छत्ता कहते हैं । इस छत्ते में मक्खियों के लिये अलग अलग बहुत से छोटे छोटे घर बने होते हैं । प्रत्येक छत्ते में तीन प्रकार की मधुमक्खियाँ होती हैं । एक तो मादा मक्खी होती है जो 'रानी' कहलाती है । इसका काम केवल गर्भ धारण करके अंडे देना होता है । यह दिन में प्रायः दो हजार अड़े देती है । प्रत्येक छत्ते में ऐसी एक ही मक्खी होती है । साधारण मक्खियों की अपेक्षा यह कुछ बड़ी भी होती है । दूसरी जाति नर मक्खियों की होती है, जिनका काम रानी को गर्भ धारण कराना होता है । और तीसरे वर्ग मे वे साधारण मक्खियाँ होती हैं जो फलों का रस पी पीकर आती हैं और उन्हें शहद या मधु के रूप में छत्तो में जमा करती हैं । जब नर मक्खियाँ मर्भधारण का कार्य करा चुकती हैं, तब उन्हें तीसरे वर्ग की साधारण मक्खियाँ मार डालती हैं । इसके अतिरिक्त छत्ता बनाने और नवजात मक्खियो के पालन पोषण का काम भी इसी तीसरे वर्ग की साधारण मक्खियाँ करती हैं । इस प्रकार अडे देने के सिवा और समग्र काम इसी वर्ग की मक्खियों द्वारा किया जाता है । मादा और काम करनेवाली मक्खियों का डंक जहरीला होता है जिससे वे अपने शत्रु को मारती हैं । जब एक छत्ता बहुत भर जाता है, तब रानी मक्खी की आज्ञा से काम करनेवाली मक्खियाँ किसी दूसरी जगह जाकर नया छत्ता बनाती हैं । शहद में से जो मैल निकलती है, उसी को मोम कहते हैं । बहुत प्राचीन काल मे प्रायः सभी देशों में लोग शहद और मोम के लिये इनका पालन करते आए हैं । इस संबंध में अंग्रेजी और हिंदी में अनेक पुस्तके भी प्रकाशित हैं ।