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मन्थरा

विक्षनरी से

मन्थरा

  1. रामायण की एक पात्र, जो रानी कैकेयी की दासी थी और जिसने राम के वनवास में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
  2. कपट और चालाकी से दूसरों को भड़काने वाली स्त्री के प्रतीक रूप में भी प्रयुक्त।

(Delhi) आईपीए(कुंजी): /mən.t̪ʰə.ɾɑː/, [mə̃n̪.t̪ʰə.ɾäː]

उदाहरण वाक्य

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  • मन्थरा ने कैकेयी को भरत के पक्ष में उकसाया।
  • लोग चालाक और द्वेष फैलाने वाली स्त्रियों को मन्थरा कहकर बुलाते हैं।

प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मंथरा संज्ञा स्त्री॰ [स॰ मन्थरा]

१. रामायण के अनुसार कैकेयी की एक दासी । उ॰—नाम मंथरा मंदमति चेरि कैकयी केरि ।—मानस । विशेष—यह दासी कैकेयी के साथ उसके मायके से आई थी । इसी के बहकाने पर कैकेयी ने रामचंद्र को बनवास और भरत को राज्य देने के लिये महाराज दशरथ से अनुरोध किया था ।

२. युक्तिकल्पतरु के अनुसार १२० हाथ लंबी, ६० हाथ चौड़ी और ३० हाथ ऊँची नाव ।