मस्ती

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

मस्ती संज्ञा स्त्री॰ [फ़ा॰]

१. मस्त होने की क्रिया या भाव । मत्तता । मतवालापन । क्रि॰ प्र॰—आना ।—उतरना ।—चढ़ना ।—दिखाना । मुहा॰—मस्ती झड़ना = मस्ती दूर होना । मस्ती झाड़ना = मस्ती दूर करना ।

२. भोग की प्रबल कामना । प्रसंग की उत्कट इच्छा । क्रि॰ प्र॰—आना ।—उठना ।—चढ़ना ।—झड़ना ।—में आना । मुहा॰—मस्ती निकालना = प्रसंग करके वीर्यपात करना । संभोग करके वीर्य स्खलित करना ।

३. वह स्राव जो कुछ विशिष्ट पशुओं के मस्तक, कान, आँख, आदि के पास से कुछ विशिष्ट अवसरों पर, विशेषतः उनके मस्त होने के समय होता है । मद । जैसे, हाथी की मस्ती, ऊँट की मस्ती । क्रि॰ प्र॰—टपकना ।—बहना ।

४. वह स्राव जो कुछ विशिष्ट वृक्षों अथवा पत्थरों आदि में से कुछ अवसरो पर होता है । जैसे, नीम की मस्ती, पहाड़ की मस्ती । क्रि॰ प्र॰—टपकना ।—बहना ।

५. अभिमान । घमंड । गर्व । गरूर ।

६. युवावस्था का मद । जवानी का नशा ।