महावीर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

महावीर ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. हनुमान जी ।

२. गौतम बुद्ध का एक नाम ।

३. गरुड़ ।

४. देवता ।

५. सिंह ।

६. मनु के पुत्र मरवानल का एक नाम ।

७. वज्र ।

८. सफेद घोड़ा ।

९. बाज पक्षी ।

१०. कोयल (को॰) ।

११. विष्णु का एक नाम (को॰) ।

१२. यज्ञ की अग्नि (को॰) ।

१३. यज्ञ में प्रयुक्त पात्र (को॰) ।

१४. जैनियों के चौबीसवें और अंतिम जिन या तीर्थंकर जो महापराक्रमी राजा सिद्धार्थ के वीर्य से उनकी रानी त्रिशला के गर्भ से उत्पन्न हुए थे । विशेष—कहते हैं, त्रिशला ने एक दिन सोलह शुभ स्वप्न देखे थे जिनके प्रभाव से वह गर्भवती हो गई थी । जब इनका जन्म हुआ तब इंद्र इन्हें ऐरावत पर बैठाकर मंदराचल पर ले गए थे और बहाँ इनका पूजन करके फिर इन्हें माता की गोद में पहुँचा गए थे । इनका नाम वर्धमान पड़ा था । ये बहुत ही शुद्ध और शांत प्रकृति के थे और भोगविलास को ओर इनकी प्रवृत्ति नहीं होती थी । कहते हैं, तीस वर्ष की अवस्था में कोई बुद्ध या अर्हंत् आकर इनमें ज्ञान का संचार कर गए थे । मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी को ये अपना राज्य और सारा वैभव छोड़कर वन में चले गए और बारह वर्ष तक इन्होंने वहाँ घोर तपस्या की । इसके उपरांत ये इधर से उधर घूमकर उपदेश देने लगे । एक बार इन्होंने भोजन त्याग दिया, जिससे वैशाख कृष्ण दशमी को इन्हों केवल ज्ञान प्राप्त हुआ था । इन्होंने मौन धारण करके राजगृह में रहना आरंभ किया । वहाँ देवताओं ने इनके लिये एक रत्नजटित प्रासाद बनाया था । वहाँ इंद्र के भेजे हुए बहुत से देवता आदि इनके पास आए, जिन्हें इन्होंने अनेक उपदेश दिए और जैन धर्मं का प्रचार आरंभ किया । कहते है कि इनके जीवनकाल में ही सारे मगध देश में जैन धर्म का प्रचार हो गया था । जैनियों कै अनुसार ईसा से ५२७ वर्ष पूर्व महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया था, और तभी से 'वीर संवत्' चला है ।

महावीर ^२ वि॰ बहुच बड़ा वीर । बहुत बड़ा बहादुर ।