मात्रा

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

मात्रा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

२. परिमाण । मिकदार । जैसे,—इसमें पानी की मात्रा अधिक है ।

२. एक वार खाने योग्य औषध ।

३. उतना काल जितना एक ह्रस्व अक्षर का उच्चारण करने में लगता है । विशेष— छंदशास्त्र में इसे मत्त, मत्ता, कल या कला भी कहते हैं ।

४. बारहखड़ी लिखाते समय वह स्वरसूचक रेखा जो अक्षर के ऊपर नीचे या आगे पीछे लगाई जाती है ।

५. किसी चीज का कोई निश्चित छोटा भाग ।

६. हाथी, घोड़ा आदि । परिच्छद ।

७. कान में पहनने का एक आभूषण ।

८. इंद्रिय जिसके द्वारा विषयों का अनुभव होता है ।

९. शक्ति ।

१०. इंद्रियों की वृत्ति । इंद्रियवृत्ति (को॰) ।

११. धन । द्रव्य (को॰) ।

१३. शिलोच्चय । पर्वत (को॰) ।

१४. अवयव । अंग ।

१५. रूप । सूक्ष्म रूप ।

१६. संगीत में गीत और वाद्य का समय 'निरूपित करने के लिये उतना काल जितना एक स्वर के उच्चारण में लगता है । विशेष—एक ह्रस्व स्वर के उच्चारण में जितना समय लगता है उसे 'ह्रस्व मात्रा' कहते है; दो ह्रस्व स्वरों के उच्चारण में जितना समय लगता है; उसे 'दीर्घ मात्रा' कहते हैं; और तीन अथवा उससे अधिक स्वरों के उच्चारण में जितना समय लगता है, उसे 'प्लुत मात्रा' कहते हैं ।