मास

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

मास संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. चंद्रमा ।

२. महीना । मास ।

मास ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰] काल के एक विभाग का नाम जो वर्ष के बारहवें भाग के बराबर होता है । महीना । विशेष—मास (को) सौर, (ख) चांद्र, (ग) नाक्षत्र या बार्हस्पत्य और (घ) सावन भेद चार प्रकार का होता है । (क) सौर मास उतने काल को कहते हैं जितने काल तक सूर्य का उदय किसी एक राशि में हो; अर्थात् सूर्य की एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति तक का समय सौर मास कहलाता है । यह मास प्रायः तीस इकतीस और कभी कभी उनतीस और बत्तीस दिन का भी होता है । (ख) चांद्र मास चंद्रमा की कला की वृद्धि और ह्वासवाले दो पक्षों का होता है जिन्हें शुक्ल और कृष्ण कहते हैं । यह मास दो प्रकार का होता है—एक मुख्य और दूसरा गौण । जो मास शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होकर अमावास्या को समाप्त होता हैं, उसे मुख्य चांद्र मास कहते हैं । इसका दूसरा नाम अमांत भी है । गौण चांद्र मास कृष्ण प्रतिपदा से आरंभ होता है और पूर्णिमा् को समाप्त होता है । इसे पूर्णिमांत भी कहते हैं । दोनों प्रकार के मास अट्ठाइस दिन के और कभी घट बढ़कर उन्तीस, तीस और सत्ताइस दिन के भी होते हैं । (ग) नाक्षत्र मास उतना काल है जितने में चंद्रमा सत्ताइस नक्षत्रों में भ्रमण करता है । यह मास लगभग २७ दिन का होता है और उस दिन से प्रारंभ होता है जिस दिन चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करता है; और उस दिन समाप्त होता है, जिस दिन वह रेवती नक्षत्र से निकलता है । (घ) सावन मास का व्यवहार व्यापार आदि व्यावहारिक कामों में होता है और यह तीस दिन का होता है । यह किसी दिन से प्रारंभ होकर तीसवें दिन समाप्त होता है । सौर और चांद्र भेद से इसके भी दो भेद हैं । सौर सावन मास सौर मास की किसी तिथि से और चांद्र सावन मास चांद्र मास की किसी तिथि या दिन से प्रारंभ होकर उसके तीसवें दिन सप्ताह होता है । प्रत्येक संवत्सर में बारह सौर और बारह ही चांद्र मास होते है; पर सौर वर्ष ३६५ दिनों का और चांद वर्ष ३५५ दिनों का होता है, जिससे दोनों में प्रतिवर्ष १० दिन का अंतर पड़ता है । इस वैषम्य को दूर करने के लिये प्रति तीसरे वर्ष बारह के स्थान में तेरह चांद्र मास होते हैं । ऐसे बड़े हुए मास को अधिमास या मलमास कहते हैं । विशेष दे॰ 'अधिमास' और 'मलमास' । वैदिक काल में मास शब्द का व्यवहार चांद्र मास के लिये होता था । इसी से संहिताओं और ब्राह्मण में कहीं बारह महीने का संवत्सर और कहीं तेरह महीने का संवत्सर मिलता है ।

२. चंद्रमा (को॰) ।

३. एक संख्या । १२ की संख्या ।

मास पु ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ मांस] दे॰ 'मांस' । उ॰—बहक न यहि बहनापरे जब तब वीर वीनास । बचै न बड़ी सवीलहु चील्ह घोंसुआ मास ।—बिहारी (शब्द॰) ।