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मिट्टी

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मिट्टी

प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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मिट्टी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ मृत्तिका, प्रा॰ मिट्टिआ]

१. पृथ्वी । भूमि । जमीन । जैसे,—जो चीज मिट्टी से बनती हैं, वह मिट्टी में ही मिल जाती है । मुहा॰—मिट्टी पकड़ना = जमीन पर दृढ़तापूर्वक जम जाना ।

२. वह भुरसुरा पदार्थ जो पृथ्वी के ठोस विभाग अथवा स्थल में साधारणत: सब जगह पाया जाता है और जो ऊपरी तल की प्रधान वस्तु है खाक । धूल । मुहा॰—मिट्टी करना = नष्ट करना । खराब करना, चौपट करना । जैसे, रुपया मिट्टी करना, इज्जत मिट्टी करना, शरीर मिट्टी करना, कपड़े मिट्टी करना । मिट्टी के मोल = बहुत सस्ता । बहुत ही थोड़े मूल्य पर । जैसे—वह मकान तो मिट्टी के मोल बिक रहा है । मिट्टी डालना = (१) किसी बात को जाने देना । छोड़ देना । (२) किसी के दोष छिपाना । परदा डालना । (३) एक प्रकार का प्रयोग जिसमें किसी की कोई छोटी मोटी चीज, विशेषत: गहना आदि, खो जाने पर सब लोग एक स्थान पर जाकर थोड़ी थोड़ी मिट्टी डाल आते हैं । इस प्रकार कभी कभी चुरानेवाला भी भयवश अथवा और किसी कारण से चुराई हुई चीज उसी मिट्टी के साथ वहाँ रख आता है, जिससे मालिक को चीज तो मिल जाती है और यह नहीं प्रकट होने पाता कि कौन चोर है । मिट्टी डलवाना = चोरी गई हुई चीज का पता लगाने के लिये लोगों से किसी स्थान पर मिट्टी डालने के लिये कहना । विशेष दे॰ 'मिट्टी डालना' । मिट्टी देना = (१) मुसलमानों में किसी के मरने पर सब लोगों का उसकी कब्र में तीन तीन मुठ्ठी मिट्टी डालना जो पुण्य कार्य समझा जाता है । (२) कब्र में गाड़ना । (मुसल॰) । मिट्टी पकड़े या छूए सोना होना = भाग्य का प्रवल होना । सितारा चमकना । साधारण कान में भी विशेष लाभ होना । मिट्टी में मिलना = (१) नष्ट होना । चौपट होना । खराब होना । (२) मरना । मिट्टी में मिलाना = नष्ट करना । चौपट करना । बरबाद करना मिट्टी हाना = (१) नष्ट होना । खराब होना । (२) गंदा या मैला कुचैला होना । यौ॰—मिट्टी का पुतला = मानव शरीर । मिट्टी की सूरत = मानव शरीर । मिट्टी के माधव = मूर्ख बेवकूफ । भांदू । मिट्टी खराबी = (१) दुर्दशा । (२) बरबादी । नाश ।

३. किसी चीज को जलाकर तैयार की हुई राख । भस्म । जैसे, पारे की मिट्टी । सोने की मिट्टी ।

४. कुछ विशेष प्रकार क ी अथवा साफ की हुई मिट्टी जो भिन्न भिन्न कामों में आती है । जैसे, मुलतानी मिट्टी, पीली मिट्टी ।

५. शरीर । जिस्म । बदन । मुहा॰—किसी की मिट्टी पलीद या बरबाद करना = दुर्दशा करना । खराबी करना । (इस अर्थ में मुहावरा अर्थ सं॰ ६ के साथ भी लगता है । मिट्टी खराब करना = बर्बाद करना । रूप बिगाड़ना । उ॰—लोग कजली की मिट्टी खराब कर रहे हैं ।—प्रेमघन॰, भा॰ २, पृ॰ ३४४ ।

६. शव । लाश । मुहा॰—मिट्टी उठना = शव की अंत्येष्टि के लिये ले जाना । जनाजा उठना । मिट्टी ठिकाने लगना = शव की उचित अंत्येष्टि क्रिया होना । मिट्टी ठिकाने लगाना = शव की उचित अंत्येष्टि क्रिया करना ।

७. खाने का गोश्त । मांस । कलिया । (क्व॰) ।

८. शारीरिक गठन । बदन की बनावट । जैसे,—उसकी मिट्टी बहुत अच्छी है, साठ वर्ष का होने पर भी जवान जान पड़ता है । मुहा॰—मिट्टी ढह जाना = शरीर में बुढ़ापे के चिह्न दिखाई देना ।

९. चंदन की जमीन जो इत्र में दी जाती है ।

मिट्टी का तेल संज्ञा पुं॰ [हिं॰ मिट्टी + का + तेल] एक प्रसिद्ध ज्वलनशील, खनिज, तरल पदार्थ जिसका व्यवहार प्राय: सारे संसार में दीपक आदि जलाने और प्रकाश करने के लिये होता है । विशेष—यह संसार के भिन्न भिन्न भागों में जमीन के अंदर पाया जाता है । कभी कभी तो जमीन में आपसे आप दरारें पड़ जाती हैं जिनमें से यह तेल निकलने लगता है, और इस प्रकार वहाँ इसके चश्मे बन जाते हैं । पर प्राय: यह जमीन में बड़े बड़े सूराख या छिद्र करके पिचकारी की तरह बडे़ बड़े यंत्रों की सहायता से ही निकाला जाता है । कभी कभी यह जमीन के अंदर गैसों के जोर करने के कारण भी अपने आप फूट पड़ता है । कुछ लोग कहते है, जमीन के अंदर जो लौह मिश्रित बहुत गरम कारवाइड होता है, उसपर जल पड़ने से यह तैयार होता है, और कुछ लोगों का मत है, कि जमीन के अंदर अनेक प्रकार के जीवों के मृतक शरीरों के सड़ने से यह तैयार होता है । एक मत यह भी है कि इसको उत्पति का संबंध नमक की उत्पत्ति से है क्योंकि अनेक स्थानों में यह नमक की खान के पास ही पाय जाता है । इसी प्रकार इसकी उत्पत्ति के संबंध में और भी अनेक मत हैं । अमेरिका के संयुक्त राज्यों तथा रूम में इसकी खानें बहुत अधिक हैं और इन्हीं दोनों देशों में सबसे अधिक मिट्टी का तेल निकलता है । भारत में इसकी खानें या तो पंजाब और बलोचिस्तान की ओर हैं या आसाम और बरमा की ओर । परंतु पश्चिमी प्रांतों से अभी तक बहुत थोड़ा तेल निकाल जाता है और पूर्वी प्रांतों से अपेक्षाकृत अधिक । इधर गुजरात तथा कच्छ आदि में भी इसकी प्राप्ति हो रही है । अरब देशों में यह रेगिस्तान के नीचे मिला है और समुद्र तल के नीचे भी यह प्राप्त हुआ है । बहुत बढ़िया तेल का रंग सफेद और स्वच्छ जल के समान होता है, पर साधारण तेल का रंग कुछ लाली या नीलापन लिए और घटिया तेल का रंग प्राय: काला होता है । बढ़िया साफ किया हुआ तेल पतला और घटिया तेल गाढ़ा होता है । प्रकाश करने के अतिरिक्त इसका उपयोग छोटे इंजन चलाने, गैस तैयार करने, अनेक प्रकार के तेलों और वारनिशों आदि को गलाने और मोमबत्तियाँ आदि बनाने में होता है । इसमें एक प्रकार की उग्र और अप्रिय गंध होती है । थोड़ी मात्रा में जबान पर लगने या गले के निचे उतरने पर यह कै लाता है; और अधिक मात्रा में भीषण विप का काम करता है । मोटरों आदि में जो पेट्रोलियम जलाया जाता है, वह भी इसी का एक भेद है ।

मिट्टी का फूल संज्ञा पुं॰ [हिं॰ मिट्टी + फूल] मिट्टी या जमीन के ऊपर जम आनेवाला एक प्रकार का छार जिसका व्यवहार कपड़ा धोने और शीशा बनाने में होता है । रेह ।

मिट्टी खरिया संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ मिट्टी + खड़िया] दे॰ 'खड़िया' ।