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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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में हुँ खोज रहा अपना विकास ।—कामायनी, पृ॰ १५८ ।

४. किना्रा । तट ।

५. छोर । किनारा ।

६. कोर, जैसे 'नयना- चल' में अंचल ।

७. तलहटी । घाटी । उ॰—उसकी वह जलन भयानक फैली गिरि अंचल मे फिर ।—कामायनी, पृ॰ २८१ । मुहा॰—अंचल जोरना = दीनता व्यक्ति करना उ॰—अंचल जोरे करत बीनती मिलिबे को सब दासी ।-सुर॰ (शब्द॰) । अंचल- देना = आँचल की ओट करना । लज्जा व्यक्त करना । परदा करना । उ॰—पीतांबर वह सिर से ओढ़त अंचल दै मुसकात ।—सुर॰, १० ।३३८ । अंचल पसारना = दे॰ 'अंचरा पसरना' । उ॰—पुर नारि सकल पसारि अंचल बिधिहि बचन सुनावही ।—मानस, १ ।३१२ । अंचल (में) गाँठ देना = याद रखने के लिये आँचल में ग्रंथि देना । बराबर स्मरण रखना । कभी न भुलना । उ॰—अंचल गाँठि दई भाज्यौ, सुख जु आनि उर पैठयो ।—सुर॰, ९ ।१६४ । अंचल रोपना = दीनता और विनय प्रदर्शन के साथ प्रार्थना करना । अँचरा पसारकर याचना करना । निहोरा करना । उ॰—चरन नाइ सिर अंचल रोपा ।—मानस, ६ ।६ । अंचल लेना = दे॰ 'अंचल देना' । उ॰—रुद्र कौ देखि कै मोहिनी लाज करि लियौ अंचल रुद्र तब अधिक मोह्यौ ।—सुर॰, ८ ।१० । अंचल भरना = (१) मंगला- शंसा के साथ बधु या पुत्री के आँचल के अन्न, टुब, हल्दी आदि डालना । एक मंगल कृत्य । (२) कामना पुरी होने का आशीर्वाद । (३) गोद भरना ।

में फँसना ।- में फँसना=दुख में पड़ना । अवसेरन मरना= दुख ले तंग आना ।

में किसी प्राणी को दुःख या पीड़ा न पहुँचाना ।

३. बौद्धशास्त्रानुसार त्रम और स्थावर को दु:ख न देना ।

४. जैनशास्त्रानुसार प्रमाद से भी त्रस और स्थावर को किसी कास में किसी प्रकार की हानि न पहुँचाना । धर्मशास्त्रानुसार शास्त्र की विधि के विरूद्ध किसी प्राणी की हिंसा न करना ।

६. कटकपाली या हैंस नाम की घास ।

७. सुरक्षा [को॰] ।

में शब्द या गति उत्पन्न करने के लिये उसे छूना । वाद्ययंत्र में क्रिया या शब्द उत्पन्न करने के लिये स्पर्श करना । बजाने के लिये बाजे में हाथ लगाना । जैसे,—सितार छेडना, सारंगी छेडना ।

७. छेद करना । †

८. नश्तर से फोडा चीरना ।