मोठ

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

मोठ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ मकुष्ठ, प्रा॰ मडट्ट] मूँग की तरह का एक प्रकार का मोटा अन्न, जो वनमूँग भी कहा जाता है । मोटा । मुगानी । मोथी । बनमूँग । विशोष—यह प्रायः सारे भारत में होता है । इसकी बोआई ग्रीष् म ऋतु के अंत या वर्षा के आरंभ में और कटाई खरीफ की फसल के साथ जाड़े के आरंभ में होती है । यह बहुत ही साधारण कोटि की भूमि में भी बहुत अच्छी तरह होता है । और प्रायः बाजरे के साथ बोया जाता है । अधिक वर्षा से यह खराब हो जाता है । इसकी फलियों में जो दाने निकलते हैं, उनकी दाल बनती है । यह दाल साधारण दालों की भाँति खाई जाती है, और मंदाग्नि अथवा ज्वर में पथ्य की भाँति भी दी जाती है । वैद्यक में इसे गरम, कसैली, मधुर, शीतल, मलरोधक, पथ्य, रुचिकारी, हलकी, बादी, कृमिजनक, तथा रक्तपित्त, कफ, वाव, गुदकील, वायुगोले, ज्वर, दाह और क्षयरोग की नाशक माना है । इसकी जड़ मादक और विषैली होती है ।

मोठ संज्ञा पुं॰ [सं॰] खट्टा मट्टा [को॰] ।