मोड़

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हिन्दी[सम्पादन]

संज्ञा[सम्पादन]

ऐसा स्थान जो मुड़ा हुआ हो। जैसे सड़क एक दिशा से दूसरे दिशा की ओर जाता है, तो वह जिस स्थान से वह दूसरे दिशा में जाता है, उसे मोड़ कहते हैं।

क्रिया[सम्पादन]

किसी को एक दिशा से दूसरे दिशा की ओर जाने के लिए कहना या सड़क पर सीधा जाते हुए किसी अन्य दिशा में बने सड़क पर जाने के लिए कहना।

उदाहरण[सम्पादन]

संज्ञा
  1. इस सड़क में कई मोड़ हैं।
  2. इस तरह के मोड़ तो मैंने पहली बार देखें हैं।
क्रिया
  1. आप उस दुकान के बाद गाड़ी को दूसरे तरह मोड़ लेना।
  2. क्या आप इस वाहन को दूसरी तरफ मोड़ सकते हो।
  3. इस डब्बे के ठक्कन को अच्छे से मोड़ कर रख देना।

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

मोड़ ^१ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ मुड़ना]

१. रास्ते आदि घूम जाने का स्थान । एक ओर फिर जाने का स्थान । वह स्थान जहाँ से किसी ओर को मुड़ा जाय । उ॰—आज बड़े लाट अमुक मोड़ पर बेष बदले एक गरीब काले आदमी से बातें कर रहे थे ।— बालमुकुंद गुप्त (शब्द॰) ।

२. घुमाव या मुड़ने की क्रिया ।

३. घुमाव या मुड़ने का भाव ।

४. कुछ दूर तक गई हुई वस्तु में वह स्थान जहाँ से वह कोना या घुमाव डालती हुई दूसरी ओर फिरी हो ।

मोड़ पु † ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ मुकुट, प्रा॰ मउर, हिं॰ मोड़] मौर । उ॰—पाई कंकण सिर बंधीयो मोड़ । प्रथम पयाड़उँ दूरग चितोड़ । रासो, पृ॰ १२ ।