योनि

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

योनि संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. आकर । खानि ।

२. वह जिससे कोई वस्तु उत्पन्न हो । उत्पादक कारण ।

३. उत्पत्ति स्थान । जहाँ से कोई वस्तु पैदा हो । उदगम ।

४. जल । पानी ।

५. कुशद्वीप की एक नदी का नाम ।

६. स्त्रियों का जननेंद्रिय । भग ।

७. प्राणियों के विभाग, जातियां या वर्ग । विशेष— पुराणानुसार इनकी संख्या चौरासी लाख है । कुछ लोगों के मत से अंडज, स्वेदज, उदभिज, और जरायुज सव इक्कीस लाख है, और कहीं कहीं इनकी संख्या इस प्रकार लिखी है— जलजंतु ... ... ... नौ लाख स्थावर ... ... ... बास लाख कृमि ... ... ... ग्यारह लाख पक्षो ... ... ... दस लाख पशु ... ... ... तीस लाख मनुष्य ... ... ... चार लाख /?/ कुल चौरासी लाख यह भी कहा गया है कि जीव को अपने कर्मों का फल भोगने के लिये इन सव योनियों में भ्रमण करना पड़ता है । मनुष्य योनि इन सवमें श्रेष्ठ और दुर्लभ मानी गई है ।

८. देर । शरीर ।

९. गर्भ ।

१०. जन्म । उत्पत्ति

११. गर्भशय ।

१२. अंतःकरण ।