रक्त

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हिन्दी[सम्पादन]

संज्ञा[सम्पादन]

  1. खून

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

रक्त ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. वह प्रसिद्ध तरल पदार्थ जो प्रायः लाल रंग का होता और शरीर की नसों आदि में से होकर वहा करता है । लहू । रुधिर । खून । विशेष—साधारणतः रक्त से ही हमारे शरीर का पोषण और रक्षण होता है । यह हृदय द्वारा परिचालित होता और सदा सारे शरीर में चक्कर लगाया करता है । शरीर के अंगों में पोषक द्रव्य रक्त के द्वारा ही पहुँचना है; और जब रक्त कहीं से चलता है, तब उस स्थान के दूषित या परित्यक्त अंश को भी अपने साथ ले लेता है । इस प्रकार इसमे जो दूषित अंश या विष जाता है, वह फुफ्फुस की क्रिया से नष्ट हो जाता है; और फुफ्फुस में आने के उपरांत रक्त फिर शुद्ध हो जाता है । हृदय से साफ रक्त चलता है, वह लाल होता है । पर फिर जब शरीर के अंगों से वही रक्त फुफ्फस की ओर चलता है, तब वह काला हो जाता है । रक्त जल से कुछ भरी होता है, स्वाद में कुछ नमकीन होता है और पारदर्शी नहीं होता । साधारणतः इसका तापमान १०० फहरन हाइट होता है; पर रोगों में यह बात घट या बढ़ जाता है । इसमें दो भाग होते हैं—एक तो तरल जिसे 'रक्तवारि' कह सकते हैं, और दूसरे रक्तकण जो उक्त' रक्तवारि' में तैरते रहते हैं । ये कण दो प्रकार के होते हैं—श्वेत और लाल । ये कण वास्तव में सजीव अणुपिंड़ हैं । शरीर से बाहर निकलने पर अथवा मृत्यु के उपरांत शरीर के अंदर रहकर भी रक्त बिलकुल जम जाता है । प्रातः सारे शरीर का १/२० वाँ भाग रक्त होता है । पशुओं का रक्त प्रयः चोनी आदि साफ करने और खाद तैयार करने के काम में आता है । हमारे यहाँ के वैद्यक शास्त्र के अनुसार यह शरीर की सात मुख्य धातुओं में से एक है और यह स्निग्ध, गुरु, चलनशील और मधुर रस कहा गया है । पर्या॰—रुधिर । लोहित । अस्त्र । क्षतज । शोणित । रोहित । रंगक । कीलाल । अंगज । स्वज । शरण । लोह । चर्मज । मुहा॰—के लिये दे॰ 'खून' के मुहावरे ।

२. कुंकुम । केसर ।

३. ताँबा ।

४. पुराना और पका हुआ आँवला ।

५. कमल ।

६. सिंदूर ।

७. हिंगुल । शिंगरफ । ईंगुर ।

८. पतंग की लकड़ी ।

९. लाल चंदन । कुचंदन ।

१०. लाल रंग ।

११. कुसुंभ ।

१२. नदीतट पर होनेवाला एक प्रकार का वेत । हिज्जल ।

१३. बंधूक । गुलदुपहरिया ।

१४. एक प्रकार की मछली ।

१५. एक प्रकार का जहरीला मेंढक ।

१६. एक प्रकार का विच्छू ।

१७. शिव का एक नाम (को॰) ।

१८. मंगल ग्रह (को॰) ।

रक्त ^२ वि॰ [सं॰]

१. चाह या प्रेम में लीन । अनुरक्त ।

२. रँगा हुआ ।

३. लाल । सुर्ख ।

४. बिहारमग्न । ऐयाश । विलासी ।

५. साफ किया हुआ । शोधित । शुद्ध ।

रक्त आमातिसार संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक प्रकार का रोग जिसमें लहू के दस्त आते है ।