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रजत

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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रजत संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. चाँदी । रूपा । उ॰—रजत सीप महँ भास जिमि जथा भानु कर बारि ।—तुलसी (शब्द॰) ।

२. सोना ।

३. हाथी दाँत ।

४. हार ।

५. रक्त । लहू ।

६. पुराणानुसार शाकद्वीप के अस्ताचल पर्वत का नाम ।

रजत ^२ वि॰

१. सफेद । शुक्ल ।

२. लाल । सुर्ख ।

३. चाँदी के रंग का । चाँदी का बना हुआ (को॰) । यौ॰—रजतकुंभ = चाँदी का घड़ा । रजतपात्र, रजतभाजन = चाँदी का बरतन ।